श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में
विशेषज्ञों ने उद्यमिता की अलख जगाई
ऽ युवा उद्यमियों को मिला नया मंच, राष्ट्रीय कार्यशाला सफलतापूर्वक सम्पन्न
देहरादून। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से आए विशेषज्ञों ने छात्रों को उद्यमिता के विभिन्न आयामों और आधुनिक विकास मॉडलों के बारे में व्यापक जानकारी दी। कार्यशाला का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में उद्यमिता के बढ़ते अवसरों से विद्यार्थियों को जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करना। यह कार्यक्रम स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एवं उद्यमिता विकास संस्थान गुजरात द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।
श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के कुलपति इंचार्ज डॉ. प्रथप्पन के. पिल्लई ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा,“कृषि क्षेत्र में उद्यमिता आज केवल एक विकल्प नहीं बल्कि भविष्य की आवश्यकता बन चुकी है। युवा आज सबसे अधिक परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं। यदि विद्यार्थी नवाचार, वैज्ञानिक
दृष्टिकोण और तकनीकी समझ को उद्यमिता से जोड़ लें, तो न केवल वे स्वयं को स्थापित कर सकते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकते हैं। विश्वविद्यालय का लक्ष्य है कि हर छात्र अपने क्षेत्र में एक सक्षम नौकरी देने वाला बने, न कि केवल नौकरी तलाशने वाला।”
एसजीआरआर विश्वविद्यालय की स्कूल आॅफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़ की डीन प्रो. प्रियंका बनकोटी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा, “भारत में कृषि आधारित स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आज ड्रोन तकनीक, फूड प्रोसेसिंग, जैविक खेती, एग्री-मार्केटिंग और स्मार्ट फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में विशाल अवसर उपलब्ध हैं। यह कार्यशाला छात्रों के भीतर छिपी उद्यमशीलता क्षमता को निखारने का माध्यम है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थियों को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संसाधनों की ऐसी सुविधा मिल सके, जिससे वे विचारों को सफल उद्यमों में बदल सकें।”
डॉ. अंजनी कुमार सिंह ने उद्यमिता के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा, “किसी भी स्टार्टअप की सफलता उसके विचार की स्पष्टता, बाजार की आवश्यकता और सही प्रबंधन रणनीति पर निर्भर करती है। कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं, परंतु सफल उद्यमी वही बनता है जो जोखिम को अवसर में बदलने की कला सीख लेता है। युवा अगर स्थानीय समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान पर काम करें, तो वे लाखों लोगों के लिए मूल्य पैदा कर सकते हैं।”
कार्यक्रम के अंत में, डॉ. गिरीश चंद्र तिवारी ने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ विद्यार्थियों को नए अवसरों और चुनौतियों के प्रति जागरूक करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।



