हाउस अरेस्ट का एक और मामला, महिला से ठगे 32 लाख
कॉल के दौरान ठग ने पुलिस की वर्दी पहनी हुई थी।
देहरादून : डिजिटल (हाउस अरेस्ट) का एक और मामला सामने आया है। आरोप है कि हाउस अरेस्ट का झूठा भय, कूट-रचित और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 32 लाख से ज्यादा की रकम ठग ली गई। डराने धमकाने के लिए आरोपी ने पुलिस की वर्दी पहनी हुई थी और खुद को मुम्बई कोलाबा का पुलिस अधिकारी बताया था। महिला की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।
शिकायत में मनोरमा पंत निवासी नरेंद्र विहार देहरादून का कहना है कि बीती 19 नवम्बर को उनके मोबाइल पर कॉल आई। इसके बाद वीडियो कॉल की गई। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का पुलिस अधिकारी बताया। कॉल के दौरान वह व्यक्ति पुलिस की वर्दी पहने हुए था। खुद को कोलाबा पुलिस का अधिकारी बता रहा था। उसने धमकाया कि और कहा कि “हाउस अरेस्ट” किया गया है। कहीं भी जाने की अनुमति नहीं है। इस दौरान झूठा आरोप लगाया। किसी आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी दी। भय उत्पन्न किया। गिरफ्तारी की धमकी देकर डराया। बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। जालसाजी और षड्यंत्र रचते हुए 19 नवम्बर को 27,12,740 रुपये ट्रांसफर करवाए गए। इसके बाद 20 नवम्बर को एक पत्र भी भेजा।
–सुप्रीम कोर्ट के फर्जी नोटिस से भी डराया।
महिला का कहना है कि इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के फर्जी और कूटरचित आदेश व्हाट्सएप नंबर पर भेजते हुए 2,05,000 संजय गुलाब कुशवाहा के नाम के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाए। इसके बाद 26 नवम्बर को तीन लाख रुपये विशाल रमेश पांडे के नाम के बैंक खाते में ट्रांसफर कराने के लिए मजबूर किया। इसके बाद भी अलग अलग नंबरों से धमकी भरी कॉल मिली। सात लाख की और मांग की गई। कहा गया कि बिना पैसे दिए केस बंद नहीं होगा। बाद में अहसास हुआ कि ठगी की शिकार हो गईं है। इस तरह से कुल 32,17,740 रुपये की साइबर ठगी की गई।, हाउस अरेस्ट का झूठा भय, एवं कूट-रचित और फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के आधार पर ठगे गए हैं । पुलिस का कहना है कि मामले में कार्रवाई की जा रही है।


