
बुजुर्गों के व्हाट्सएप में लगाएं ‘सुरक्षा का ताला’
साइबर ठग पुलिस अफसर बनकर डरा रहे, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाखों की ठगी
देहरादून। साइबर ठग अब घर के बुजुर्गों को अपना आसान निशाना बना रहे हैं। पुलिस, सीबीआई, क्राइम ब्रांच, नारकोटिक्स या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन करना और फिर गिरफ्तारी का डर दिखाकर लाखों रुपये ऐंठना साइबर अपराध का नया तरीका बन चुका है। ऐसे मामलों में परिवार के युवा सदस्य अपने माता-पिता और बुजुर्गों के स्मार्टफोन की सुरक्षा सेटिंग जांचकर जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
व्हाट्सएप में उपलब्ध ‘स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग’ को ऑन करना अतिरिक्त सुरक्षा उपाय के तौर पर मददगार हो सकता है। इस सेटिंग के जरिए अनजान या संदिग्ध संपर्कों से आने वाली कुछ गतिविधियों को सीमित किया जा सकता है। हालांकि, इसे साइबर ठगी से बचाव की पूर्ण गारंटी नहीं माना जा सकता। बुजुर्गों को जागरूक करना और संदिग्ध फोन आने पर तुरंत परिवार को जानकारी देना भी उतना ही जरूरी है।
ऐसे बुना जाता है डिजिटल अरेस्ट का जाल
साइबर ठग सबसे पहले फोन या वीडियो कॉल करते हैं। खुद को पुलिस, सीबीआई, क्राइम ब्रांच, नारकोटिक्स या किसी दूसरी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया जाता है। ठग दावा करते हैं कि उनके नाम से कोई आपराधिक गतिविधि हुई है, उनका मोबाइल नंबर या बैंक खाता किसी अपराध से जुड़ा है अथवा उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो गया है।
इसके बाद वीडियो कॉल पर रहने, किसी से बात न करने और मामले की जानकारी किसी को न देने का दबाव बनाया जाता है। जांच या बैंक खाते को ‘सुरक्षित’ रखने के नाम पर रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर करने को कहा जाता है। लगातार मानसिक दबाव में रखकर पीड़ित से बड़ी रकम ट्रांसफर करा ली जाती है। इसी तरह की ठगी को आम तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है।
रिटायर्ड शिक्षिका से 73 लाख से ज्यादा की ठगी
देहरादून में हाल ही में एक रिटायर्ड शिक्षिका भी इसी तरह के साइबर ठगों के जाल में फंस गईं। ठगों ने खुद को क्राइम ब्रांच और अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर महिला को करीब दो सप्ताह तक मानसिक दबाव में रखा। फाइनेंशियल फ्रॉड में फंसने और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में 73 लाख रुपये से अधिक ट्रांसफर करा लिए गए।
बताया गया कि महिला का बेटा डॉक्टर है, लेकिन ठगों के दबाव के चलते उन्होंने इस दौरान अपने बेटे को भी मामले की जानकारी नहीं दी। रकम ट्रांसफर करने के बाद जब महिला को ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत की। शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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इनसेट : चार स्टेप में ऑन करें सुरक्षा कवच
1. व्हाट्सएप खोलकर सेटिंग में जाएं।
2. प्राइवेसी विकल्प पर टैप करें।
3. प्राइवेसी मेन्यू में नीचे जाकर एडवांस्ड विकल्प खोलें।
4. यहां उपलब्ध स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग को ऑन कर दें।
इनसेट : सेटिंग ऑन करने से क्या फायदा?
अनजान और संदिग्ध संपर्कों से होने वाली कुछ गतिविधियों को सीमित करने में मदद मिल सकती है।
संदिग्ध कॉल, मैसेज और खतरनाक लिंक से जुड़े जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।
बुजुर्गों के लिए यह अतिरिक्त प्राइवेसी लेयर की तरह काम कर सकती है।
अनजान नंबरों से आने वाले संदिग्ध कंटेंट के संपर्क में आने की संभावना कम हो सकती है।
ध्यान रखें— यह सेटिंग साइबर ठगी को पूरी तरह नहीं रोकती। बुजुर्गों को साइबर ठगों के तरीकों के बारे में जागरूक करना सबसे जरूरी है।
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: फोन पर नहीं होता डिजिटल अरेस्ट
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह का कहना है कि “सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि पुलिस फोन पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल पर भरोसा न करें। ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंक से संबंधित जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी के कहने पर पैसे दूसरे खाते में ट्रांसफर न करें। संदिग्ध कॉल आने पर तत्काल परिवार के सदस्यों को इसकी जानकारी दें। यदि साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, रकम को रोकने या वापस हासिल करने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है।”
— अजय सिंह, एसएसपी, एसटीएफ

