भीषण गर्मी के बीच 30 दिनों में 133 अग्नि दुर्घटनाएं
फायर सर्विस को मिली मई माह में 133 कॉल्स, दुर्घटनाओं पर पाया काबू
देहरादून,
मई के महीने में रिकॉर्ड तोड़ तापमान और भीषण गर्मी के चलते देहरादून में आग लगने की घटनाओं में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। बीते एक माह यानी की तीन दिन के भीतर 133 आग लगाने से संबंधित कॉल्स फायर सर्विस को मिली। जिले भर से मिली सभी 133 अग्नि दुर्घटनाओं की सूचनाओं पर त्वरित कार्यवाही की गई। ना सिर्फ वनों और जन-धन की हानि को न्यूनतम किया गया, बल्कि करोड़ों रुपये की आवासीय व व्यावसायिक संपत्तियों को भी सुरक्षित बचाया गया।
जानकारी के मुताबिक आग लगने की बड़ी सूचनाओं में देहरादून फायर स्टेशन क्षेत्र में पेनिसिया अस्पताल, 6 नंबर पुलिया के पास फास्ट फूड कॉर्नर, ट्रांसपोर्ट नगर में एक गेस्ट हाउस में आग लगने की प्रमुख घटनाएं शामिल हैं। इसके अलावा विकासनगर फायर स्टेशन क्षेत्र के रसूलपुर में एक ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में भीषण आग की घटना प्रमुख थी। वहीं, अलग अलग क्षेत्रों में समय- समय पर बिजली के पोल, जंगलों, घरों और दुकानों सहित अन्य स्थानों में आग लगने की छोटी-बड़ी शिकायतें मिली। बताया गया है कि फायर सर्विस ने इस बार पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर कुछ विशेष रणनीतियों और तकनीकों का उपयोग किया। बताया गया है कि कई नई तकनीक अपनाई गई है। जिससे गोल्डन ऑवर’ रिस्पॉन्स टाइम में सुधार किया गया। कंट्रोल रूम को सूचना मिलने के बाद तंग गलियों और ट्रैफिक के बावजूद फायर टेंडर का रिस्पॉन्स टाइम औसतन 5 से 7 मिनट दर्ज किया गया, जिससे आग को विकराल रूप लेने से पहले ही दबा दिया गया। वॉटर मिस्ट तकनीक को अपनाकर शहर के घनी आबादी वाले और संकरे रास्तों में त्वरित पहुंच के लिए वॉटर मिस्ट सिस्टम से लैस फायर बाइक्स का इस्तेमाल किया गया।
इनसेट–
स्टेशन-वार फायर कॉल्स:
* फायर स्टेशन देहरादून: 58 कॉल्स
* फायर स्टेशन विकासनगर: 18 कॉल्स
* फायर स्टेशन ऋषिकेश: 17 कॉल्स
* फायर स्टेशन डोईवाला: 09 कॉल्स
* फायर स्टेशन मसूरी: 01 कॉल
* फायर स्टेशन सेलाकुई: 17
* फायर यूनिट त्यूणी: 13
अभिनव त्यागी मुख्य अग्निशमन अधिकारी देहरादून का कहना है कि
मई का महीना हमारी टीम के लिए अग्निपरीक्षा जैसा था। 133 घटनाओं में से हर एक घटना संवेदनशील थी। हमारे जवानों ने चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रहकर काम किया है। हमारा मुख्य उद्देश्य केवल आग बुझाना नहीं, बल्कि रिस्पॉन्स टाइम को कम करके अमूल्य मानव जीवन और प्रकृति की रक्षा करना था, जिसमें हम पूरी तरह सफल रहे।”


