मजबूत सुरक्षा चक्र में रहेगा कांवड़ मेला, एटीएस, बीडीएस, एसटीएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात

24 घंटे मुस्तैदी, ड्रोन और सीसीटीवी से होगी राउंड-द-क्लॉक मॉनिटरिंग
साइबर कमांडो सोशल मीडिया और साइबर स्पेस पर रखेंगे पैनी नजर
डीजीपी दीपम सेठ ने अधिकारियों के साथ की बैठक

देहरादून, संवाददाता—आगामी कांवड़ यात्रा को लेकर सुरक्षा चक्र तैयार किया गया है। कांवड़ मेले के दौरान एटीएस, बीडीएस, एसटीएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई। वहीं, 24 घंटे मुस्तैदी, ड्रोन और सीसीटीवी से होगी राउंड-द-क्लॉक मॉनिटरिंग की जाएगी। साथ ही साइबर कमांडो सोशल मीडिया और साइबर स्पेस पर पैनी नजर रखेंगे।


कांवड़ मेला की सुरक्षित और व्यवस्था को लेकर डीजीपी दीपम सेठ ने समीक्षा बैठक की। जिसमें सुरक्षा, यातायात, तकनीकी निगरानी और अंतरराज्यीय समन्वय को लेकर निर्देश दिए गए। पुलिस मुख्यालय स्थित सभागार में आयोजित बैठक में पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कांवड़ यात्रा से संबंधित जनपद देहरादून, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग, जीआरपी के पुलिस अधीक्षकों, सेनानायक एसडीआरएफ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रतिभाग किया। बैठक में कांवड़ मेले की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए पुलिस महानिदेशक ने कहा कि कांवड़ मेला एक विशाल और अति-संवेदनशील धार्मिक आयोजन है। कांवड़ियों की सुरक्षा, सुगम आवागमन, प्रभावी यातायात प्रबंधन व कानून-व्यवस्था बनाए रखना उत्तराखंड पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी अधिकारियों को समय रहते समुचित तैयारियां पूर्ण करने तथा संबंधित राज्यों व विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करने के लिए निर्देशित किया।
कांवड़ यात्रा मार्गों पर स्थित संवेदनशील और अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों का आकलन कर वहां पर्याप्त संख्या में पुलिस बल, रिजर्व फोर्स और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती करने को कहा गया है। निर्देशित किया गया है कि कांवड़ियों की सुरक्षा के दृष्टिगत एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस), बम निरोधक दस्ता (बीडीएस), एसटीएफ और अभिसूचना इकाइयों की टीमों को प्रमुख स्थलों पर सक्रिय रखा जाए तथा संदिग्ध व्यक्तियों एवं गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जाए। रैपिड रिस्पांस टीम को हर समय सक्रिय रखा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्यवाही की जा सके। इसके साथ ही सभी प्रमुख स्नान घाटों पर गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीमें तैनात रहें, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य संचालित किया जा सके। बैठक में एडीजी वी. मुरूगेशन, एपी. अंशुमान, आईजी विम्मी सचदेवा, कृष्ण कुमार वी.के, नीलेश आनन्द भरणे, सुनील कुमार मीणा, योगेन्द्र सिंह रावत, बरिंदरजीत सिंह, डीआईजी धीरेन्द्र गुंज्याल, एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह, पुलिस अधीक्षक, अभिसूचना मणिकांत मिश्रा सहित अन्य पुलिस अधिकारी शामिल हुए।
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–ये की गई जा रही है विशेष तैयारी-
-कांवड़ यात्रा मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग, वैकल्पिक मार्गों, पार्किंग स्थलों, होल्डिंग एरिया और डायवर्जन का विस्तृत ट्रैफिक प्लान तैयार किया जा रहा है। डीजीपी दीपम सेठ ने कहा कि इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार उत्तराखण्ड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और अन्य सीमावर्ती राज्यों में फ्लैक्स, होर्डिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से किया जाए, ताकि श्रद्धालु पूर्व से ही निर्धारित यातायात व्यवस्था से अवगत हो सकें। साथ ही, किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए कंटीजेंसी प्लान भी पूर्व से तैयार रखा जाए। यात्रा के दौरान भारी वाहनों के समयबद्ध डायवर्सन, अस्थायी पुलिस चौकियों की स्थापना, मोबाइल पेट्रोलिंग और पैदल व डाक कांवड़ियों के लिए निर्धारित मार्ग से आवागमन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही स्थानीय नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक यातायात व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन किया जाए।
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जोन और सेक्टरों में विभाजित
बताया कि सम्पूर्ण कांवड़ यात्रा मार्ग के साथ ही रेलवे परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कांवड़ मेला क्षेत्र को सुपर जोन, जोन और सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा। ताकि रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज, प्रतीक्षालय और ट्रेनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण व निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जा सके। सुरक्षा की दृष्टि से सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों, घाटों, कांवड़ मार्गों और भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन के माध्यम से 24×7 निगरानी सुनिश्चित की जाए। पार्किंग स्थलों, होल्डिंग एरिया और अन्य सार्वजनिक स्थलों का फायर सेफ्टी ऑडिट पूर्व में ही पूर्ण करा लिया जाए और किसी भी आपात स्थिति से निपटने हेतु पर्याप्त अग्निशमन संसाधन उपलब्ध रखे जाएं।
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डीजे व लाउडस्पीकरों का उपयोग निर्धारित मानक के अनुरूप
डीजीपी ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। निर्धारित मानकों के अनुरूप कांवड़ के आकार का पालन करने, रेल की छतों पर यात्रा ना करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये। साथ ही ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए डीजे व लाउडस्पीकरों का उपयोग उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित मानक डेसीबल सीमा के अनुरूप हो। इसके लिए राज्य की सीमाओं और कांवड़ यात्रा मार्गों पर नियमित चेकिंग की जाए।
— मौसम, सुरक्षा संबंधित सूचनाएं–
बताया गया है कि सोशल मीडिया सेल के माध्यम से कांवड़ यात्रा से संबंधित यातायात, डायवर्जन, मौसम, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सूचनाएं नियमित रूप से साझा की जाएं। व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उन्हें सीमावर्ती राज्यों की पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल को टैग करते हुए प्रसारित किया जाए। साथ ही सोशल मीडिया पर सतत निगरानी रखते हुए किसी भी भ्रामक अफवाह या आपत्तिजनक सामग्री का तत्काल खंडन कर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साइबर कमाण्डोज की विशेष टीम हरिद्वार में कैम्प कर सोशल मीडिया और साइबर स्पेस पर 24×7 निगरानी रखेगी। किसी भी साइबर या सोशल मीडिया संबंधी चुनौती पर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करेगी। अंतरराज्यीय समन्वय और आपात तैयारी के तहत सीमावर्ती राज्यों व जनपदों के पुलिस अधिकारियों के साथ नियमित समन्वय बैठक आयोजित की जाएं। इंटेलिजेंस इनपुट्स का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाए।
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साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों पर निगरानी
कांवड़ मेले के दौरान ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाने के निर्देश दिए गए है। उनकी तैनाती स्थलों के निकट ही आवास, भोजन, पेयजल, विश्राम और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उनका मनोबल और कार्यक्षमता बनी रहे।वहीं, श्रद्धालुओं के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार रखा जाएगा। असामाजिक, शरारती और साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों पर विशेष निगरानी रखी जाए। कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होगी।
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