साइबर ठगों का नया जाल: ‘साइबर क्राइम रिपोर्ट’ के नाम पर लोगों को बना रहे शिकार
नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल जैसी फर्जी वेबसाइट बनाकर वसूली की कोशिश, ‘डिवाइस ब्लॉक’ का डर दिखाकर मांग रहे जुर्माना; अधिकारियों ने जारी की चेतावनी
देहरादून/नई दिल्ली
देश में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका अपनाया है। अब ठग उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जो इंटरनेट पर साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने का तरीका खोज रहे हैं। साइबर अपराधी नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट तैयार कर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं और उनसे पैसे ऐंठने का प्रयास कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर ठगों ने सरकारी पोर्टल की डिजाइन और इंटरफेस की नकल कर ऐसे नकली प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं जो पहली नजर में बिल्कुल असली प्रतीत होते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन वेबसाइटों पर पहुंचता है, उसकी स्क्रीन पर एक पॉप-अप संदेश दिखाई देता है जिसमें दावा किया जाता है कि उसका मोबाइल फोन या कंप्यूटर ब्लॉक कर दिया गया है। इसके बाद डिवाइस को अनलॉक करने के नाम पर कथित जुर्माना या शुल्क जमा कराने का दबाव बनाया जाता है।
साइबर सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह पूरी तरह से फर्जीवाड़ा है और इसका उद्देश्य लोगों में डर पैदा कर उनसे तत्काल भुगतान करवाना है।
ऐसे काम करता है साइबर ठगों का नया खेल
✔ गूगल या अन्य सर्च इंजन पर साइबर शिकायत संबंधी कीवर्ड सर्च करने वालों को निशाना बनाया जाता है।
✔ सरकारी पोर्टल जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट पर पहुंचाया जाता है।
✔ स्क्रीन पर ‘डिवाइस ब्लॉक’ या ‘कानूनी कार्रवाई’ की चेतावनी दिखाई जाती है।
✔ डर और घबराहट का माहौल बनाकर तुरंत भुगतान करने को कहा जाता है।
✔ भुगतान होते ही ठग पैसे लेकर गायब हो जाते हैं।
बढ़ रही है साइबर अपराधियों की सक्रियता
पिछले कुछ वर्षों में देशभर में साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। ऑनलाइन निवेश, फर्जी ट्रेडिंग ऐप, डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी अपडेट, बैंक खाते फ्रीज होने की धमकी और अब साइबर शिकायत पोर्टल के नाम पर ठगी जैसे नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं।
साइबर अपराधी लगातार लोगों की मनोवैज्ञानिक कमजोरियों का फायदा उठाने का प्रयास कर रहे हैं। कभी पुरस्कार जीतने का लालच दिया जाता है तो कभी कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी का डर दिखाकर लोगों को झांसे में लिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डर और जल्दबाजी साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार है।
अधिकारियों की सलाह
साइबर सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार नागरिकों को किसी भी सरकारी सेवा का उपयोग करते समय वेबसाइट के यूआरएल की जांच अवश्य करनी चाहिए। किसी भी लिंक पर क्लिक करने के बजाय संबंधित वेबसाइट का पता स्वयं ब्राउजर में टाइप करना सबसे सुरक्षित तरीका है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत सरकार या कोई भी सरकारी एजेंसी किसी पॉप-अप विंडो के माध्यम से जुर्माना जमा करने या भुगतान करने के निर्देश नहीं देती। यदि कोई वेबसाइट या संदेश ऐसा दावा करता है तो उसे संदिग्ध मानना चाहिए।
बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
● साइबर अपराध की शिकायत के लिए केवल cybercrime.gov.in का ही उपयोग करें।
● किसी भी डराने वाले पॉप-अप संदेश पर भरोसा न करें।
● वेबसाइट का यूआरएल ध्यान से जांचें।
● किसी अनजान लिंक के माध्यम से भुगतान न करें।
● संदिग्ध वेबसाइट मिलने पर उसकी शिकायत करें।
● मोबाइल और कंप्यूटर में सुरक्षा अपडेट नियमित रूप से इंस्टॉल करें।
यदि ठगी का शिकार हो जाएं तो क्या करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी व्यक्ति से ऑनलाइन ठगी हो जाती है तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए और आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। त्वरित शिकायत से धोखाधड़ी की गई राशि को रोकने या वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है।



