सड़क सुरक्षा : चार ई पर फोकस— इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट, एजुकेशन, इमरजेंसी केयर
सड़क सुरक्षा के लिए फोर-ई पर फोकस बेहद महत्वपूर्ण
हेलमेट, लाइसेंस और इंश्योरेंस के बिना प्रवेश पर सख्ती के निर्देश
देहरादून। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए फोर-ई (4E)—इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट, एजुकेशन और इमरजेंसी केयर के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही दुर्घटनाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण करके कारणों, मौतों की वजह और भविष्य में दुर्घटना रोकने के उपाय तय करने पर भी फोकस किया जा रहा है। वहीं, पहाड़ी मार्गों पर क्रैश बैरियर, चारधाम यात्रा मार्गों पर ट्रामा सेंटर और चालक विश्राम गृह, पॉट होल से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम व गोल्डन ऑवर में घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया।
दरअसल, सड़क दुर्घटनाओं में लगातार हो रही मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी ने उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कई अहम निर्देश दिए हैं। सोमवार को जस्टिस अभय मनोहर स्प्रे, सेवानिवृत्त न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय और अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी ने सड़क हादसों से लेकर बचाव के उपायों पर बैठक की। जिसमें मुख्य सचिव सहित अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ सभी जनपदों के डीएम के साथ सड़क सुरक्षा में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण करने के लिए दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को लेकर कम करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान प्रत्येक जिले को जीरो फैटेलिटी जिला बनाने की दिशा में काम करने और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मानकों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया।
इनसेट—
इन बिंदुओं पर भी फोकस-
– प्रधानमंत्री राहत योजना का प्रभावी प्रचार-प्रसार
– सरकारी कर्मचारियों व संस्थानों में मोटरयान नियमों के अनुपालन
– ड्राइविंग लाइसेंस से पहले कंप्यूटरीकृत ड्राइविंग टेस्ट
– चारधाम यात्रा मार्गों पर निगरानी बढ़ाने को कहा गया
– एएनपीआर कैमरों की संखया बढ़ाने के निर्देश
– चार धाम यात्रा मार्गों पर सीएसआर के तहत ट्रामा सेंटर
– पॉट होल्स के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर नियंत्रण, सुधारीकरण
– सड़क सुरक्षा समितियों की हर माह बैठक
– गोल्डन ऑवर में दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल चिकित्सा सुविधा
– रिस्पॉन्स टाईम में सुधार किया जाए।
इनसेट—-पैदल यात्रियों की सुरक्षा-
इस दौरान कहा गया है कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर हाल ही में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में नियमावली व एसओपी समय से बनाई जाए और उसकी आख्या सुप्रीम कोर्ट कमेटी को प्रेषित की जाए। साथ ही बोला गया है कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए केवल प्रवर्तन कार्यवाही ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि, जनजागरूकता भी जरूरी है। जागरूकता कार्यक्रमों को केवल स्कूलों और कॉलेजों तक सीमित न रखकर प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों को इससे जोड़ा जाए। पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाली दुर्घटनाओं की स्थिति में वाहन को गहरी खाई में गिरने से बचाने के लिए सभी मार्गों पर क्रैश बैरियर की स्थापना अनिवार्य है। राज्य में अवशेष मार्गों पर क्रैश बैरियर की स्थापना के लिए समय-सीमा निर्धारित करते हुए कार्यवाही की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि स्थापित किये जाने वाले क्रैश बैरियर आईआरसी मानकों के अनुरूप हों। बताया गया है कि समीक्षा में यह भी सामने आया कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में होने वाली दुर्घटनाओं में जनहानि अधिक है।
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बाक्स–
अगस्त तक हादसों का आंकड़ा
08 माह: 1480 हादसे → 884 मौतें → 1626 घायल
–इस साल अब तक सबसे ज्यादा मौत वाले चार जिले
ऊधमसिंह नगर — 229 मौत, 338 घायल
हरिद्वार — 213 मौत, 279 घायल
देहरादून — 131 मौत, 322 घायल
नैनीताल — 104 मौत, 334 घायल—
इनसेट—
पहाड़ों में क्रैश बैरियर अनिवार्य
पर्वतीय क्षेत्रों में वाहनों के गहरी खाई या खड्ड में गिरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सभी मार्गों पर क्रैश बैरियर लगाने पर जोर दिया गया है। राज्य के अवशेष मार्गों पर क्रैश बैरियर लगाने के लिए समय-सीमा तय करने और यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि लगाए जाने वाले क्रैश बैरियर आईआरसी मानकों के अनुरूप हों। कहा गया है कि जिलों में होने वाली प्रत्येक सड़क दुर्घटना का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किया जाएगा। इसमें दुर्घटना के कारण, मौत होने की वजह, भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय और उन उपायों के समयबद्ध क्रियान्वयन की समीक्षा शामिल होगी। जिला सड़क सुरक्षा समितियों की बैठक नियमित रूप से कर लिए गए निर्णयों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने और उसका विवरण पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए।
–सिर्फ चालान से नहीं रुकेगी दुर्घटना
कमेटी ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए केवल प्रवर्तन कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। आम जनमानस में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। जागरूकता कार्यक्रमों को केवल स्कूल-कॉलेज तक सीमित न रखते हुए हर आयु वर्ग के लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। कहा गया कि दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गोल्डन ऑवर रिस्पॉन्स टाइम में सुधार करने पर जोर दिया गया। इसके लिए मेडिकल सुविधा तक घायल को जल्द पहुंचाने की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सड़क दुर्घटनाओं में आवारा पशुओं की भूमिका को देखते हुए उनकी वजह से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए राज्य सरकार को नीति बनाने के निर्देश दिए गए हैं।


