एआई आधारित स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में उत्तराखंड पुलिस की पहल
एआई फॉर स्मार्ट पुलिसिंग पर आयोजित कार्यशाला
आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों और उत्तराखंड पुलिस का उच्च स्तरीय मंथन
तकनीक और मानवीय विवेक के समन्वय से स्मार्ट पुलिसिंग को देंगे नई दिशा — डीजीपी दीपम सेठ


देहरादून, संवाददाता : उत्तराखंड पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से अपराध नियंत्रण, इंटेलिजेंट सर्विलांस, साइबर सुरक्षा और डेटा आधारित पुलिसिंग को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में डीजीपी दीपम सेठ की अध्यक्षता में सरदार पटेल भवन स्थित सभागार में ‘एआई फॉर स्मार्ट पुलिसिंग’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। बताया कि इस पहल से एआई से स्मार्ट पुलिसिंग पर फोकस होगा। वहीं, अपराध के पैटर्न का बेहतर विश्लेषण किया जा सकेगा। इंटेलिजेंट सर्विलांस को मजबूती मिलेगी साथ ही साइबर अपराधों से निपटने में तकनीकी मदद भी मिलेगी। डेटा आधारित और त्वरित निर्णय लेने में सहूलियत होगी। रिकॉर्ड प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर विशेष जोर रहेगा।
कार्यशाला में आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों और उत्तराखंड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच आधुनिक तकनीक के पुलिसिंग में उपयोग को लेकर मंथन हुआ। चर्चा का फोकस रोजमर्रा की पुलिसिंग, अपराध की रोकथाम, बेहतर निर्णय क्षमता, इंटेलिजेंट सर्विलांस और उभरती साइबर सुरक्षा चुनौतियों पर रहा। कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में आईआईटी रुड़की के प्रो. सौमित्र सतपथी, प्रो. सुदीप रॉय, प्रो. राघवेंद्र सिंह रोहित और अपर पुलिस अधीक्षक अभिसूचना, सुरक्षा अंकुश मिश्रा ने एआई की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। विशेषज्ञों ने ‘एआई इन एवरीडे पुलिसिंग’, ‘फ्रॉम क्राइम प्रिवेंशन टू स्मार्टर डिसीजन मेकिंग’, ‘एआई फॉर स्मार्ट पुलिसिंग’ और ‘इमर्जिंग साइबर सिक्योरिटी चैलेंजेस फॉर पुलिस’ जैसे विषयों पर चर्चा की।
पुलिस अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच अपराध विश्लेषण, डेटा आधारित पुलिसिंग, रिकॉर्ड प्रबंधन और साइबर अपराध से निपटने में एआई के संभावित उपयोग पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और तकनीक की विश्वसनीयता जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। डीजीपी दीपम सेठ ने कहा कि एआई और आधुनिक तकनीक पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, त्वरित और डेटा आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई मानव विवेक का विकल्प नहीं होगा, बल्कि पुलिस अधिकारियों की निर्णय क्षमता को मजबूत करने का माध्यम बनेगा। कार्यशाला में एडीजी अपराध एवं कानून व्यवस्था वी. मुरूगेशन, एडीजी प्रशासन ए.पी. अंशुमान सहित पुलिस मुख्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।-

