54 करोड़ के हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले के आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी
लखनऊ, दिल्ली, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश, देहरादून में तलाशी
कोर्ट से सर्च वारंट हासिल कर की गई कार्रवाई
घोटाले से सम्बन्धित पत्रावलियों व अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को लिया कब्जे में
देहरादून/हरिद्वार —
विजिलेंस की आठ टीमों ने सर्च वारंट हासिल कर बहुचर्चित 54 करोड़ के हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले के आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज मामलों के तहत मुकदमा दर्ज करने के बाद की गई। शुक्रवार देर शाम दो टीमें लौट आई थी, जबकि, अन्य जगहों पर छानबीन जारी थी। इस दौरान लखनऊ, दिल्ली, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश, देहरादून में तलाशी ली गई और घोटाले से सम्बन्धित पत्रावलियों व अन्य दस्तावेज कब्जे में लिए गए।
जानकारी के मुताबिक विजिलेंस की अलग-अलग टीमों ने देहरादून, हरिद्वार (कनखल), दिल्ली, लखनऊ, प्रयागराज और रुद्रप्रयाग समेत नौ स्थानों पर एक साथ दबिश दी। सुबह चार बजे टीमें अलग अलग ठिकानों पर पहुंच चुकी थी। कार्रवाई के दौरान टीमों ने भूमि खरीद, प्रशासनिक स्वीकृतियों, और बैंक लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज व डिजिटल साक्ष्य (लैपटॉप, मोबाइल फोन) कब्जे में लिए। विजिलेंस से मिली जानकारी के मुताबिक हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाला प्रकरण में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच के बाद राज्य सरकार की अनुमति से थाना सतर्कता सेक्टर देहरादून में मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद 10 अभियुक्त वरुण चौधरी (तत्कालीन नगर आयुक्त ) रविंद्र कुमार दयाल, लक्ष्मीकान्त, आनन्द मिश्रवाण, वेदपाल, दिनेश काण्डपाल, जितेन्द्र कुमार, सुमन देवी, अभिषेक व सुजीत कुमार के आवास टीमें पहुंची। घोटाले से सम्बन्धित पत्रावलियों व अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को कब्जे में लेने और इन कर्मचारियों के भ्रष्टाचार के अन्य कार्यों में लिप्त होने के सम्बन्ध में न्यायालय द्वारा जारी सर्च वारंट की तामील की गई और सर्च अभियान चलाते हुए लखनऊ, दिल्ली, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश, देहरादून में तलाशी की कार्यवाही की गयी । 08 टीमें भेजकर सुबह से ही तलाशी अभियान शुरू किया गया। कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों के पास से महत्वपूर्ण दस्तावेज कब्जे में लिये गये हैं। आने वाले समय में इन्हीं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर मामले में अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी ।
डीएम को मेजर पनिशमेंट, नगर आयुक्त हुए थे बर्खास्त
दरअसल, हरिद्वार में 13 करोड़ मूल्य की 33 बीघे जमीन को कृषि से अकृषि में बदलने और उसे 54 करोड़ में खरीदकर सरकारी राजस्व की हेराफेरी करने के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा एक्शन लिया था। इस मामले में पहले से निलंबित चल रहे हरिद्वार के तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को मेजर पनिशमेंट यानी मूल पद पर वापसी और नगर आयुक्त वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश दिया गया था। इसके अतिरिक्त हरिद्वार के तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह (पीसीएस अधिकारी) के खिलाफ परिनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन वेतन वृद्धियां रोकने के निर्देश भी दिए थे। यह कार्रवाई जांच अधिकारी रणवीर सिंह चौहान की संस्तुति पर की गई थी। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने विजिलेंस को विस्तृत जांच करने को कहा था। विजिलेंस ने अपनी जांच रिपोर्ट मुख्य सचिव आनंद वर्धन की अध्यक्षता वाली सतर्कता समिति को सौंपी थी। सतर्कता समिति ने संबंधित सभी अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की संस्तुति सीएम पुष्कर सिंह धामी से की थी। इस संस्तुति के आधार पर मुख्यमंत्री ने नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया था। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया था।


