साइबर ठगी का शिकार होने पर होल्ड रकम हासिल करना अब आसान
एमआरएम पोर्टल पर पीड़ित खुद घर बैठे रिफंड रिक्वेस्ट दर्ज कर सकेंगे।
मनी रिस्टोरेशन माडल (एमआरएम) पोर्टल शुरू हो गया है।
उत्तराखंड/ देहरादून— अभी तक साइबर ठगी का शिकार होने के बाद त्वरित कार्रवाई के दौरान रकम होल्ड होने पर भी लोगों को परेशान होना पड़ता था। लेकिन, अब साइबर अपराध के पीड़ितों को अपनी होल्ड रकम वापस पाने के लिए अलग अलग स्थानों पर जाकर परेशान नहीं होना पड़ेगा। गृह मंत्रालय के नए एमआरएम पोर्टल पर नागरिक खुद घर बैठे रिफंड रिक्वेस्ट दर्ज कर सकेंगे। साइबर धोखाधड़ी से पीड़ित नागरिको की होल्ड धनराशि वापस दिलाने के लिए गृह मंत्रालय (आईफोरसी) का मनी रिस्टोरेशन मॉडल (एमआरएम) पोर्टल शुरू हो गया है।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों को त्वरित राहत देने और उनकी होल्ड (फ्रीज) कराई गई धनराशि को पीड़ितों के बैंक खातों में वापस भेजने के लिए प्रभावी विधिक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार के गृह मंत्रालय के ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (आईफोरसी) द्वारा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के अंतर्गत एक नया मनी रिस्टोरेशन मॉडल पोर्टल सार्वजनिक रूप से लाइव किया है। बताया कि आम आदमी को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से राहत दिलाने और उनके होल्ड पैसे को वापस कराने के लिए इस नई पारदर्शी व्यवस्था को लागू किया गया है। इस डिजिटल व्यवस्था के अंतर्गत अब पीड़ितों को अपनी होल्ड कराई गई धनराशि को वापस पाने के लिए अलग अलग स्थानों पर जाकर परेशान नहीं होना पड़ेगा, वे स्वयं ऑनलाइन माध्यम से अपनी रिफंड रिक्वेस्ट जनरेट कर सकते हैं।
।।पीड़ित आवेदन करने के लिए पात्र।।।
इस पोर्टल (एमआरएम) पर केवल वही साइबर पीड़ित आवेदन करने के लिए पात्र हैं, जिन्होंने एनसीआरपी पोर्टल या 1930 हेल्पलाइन पर तत्काल शिकायत दर्ज कर 14-अंकीय रजिस्टर्ड एक्नॉलेजमेंट नंबर हासिल कर लिया हो। जिनके मामले में अपराधियों के बैंक खातों में पीड़ित की धनराशि ‘होल्ड’ कराई जा चुकी है। विशेष तौर पर बयाया गया है कि यह पोर्टल उन मामलों के लिए नहीं है जहां पैसा अपराधियों ने बैंक खातों से निकाल लिया हो। केवल ‘होल्ड धनराशि’ वाले प्रकरणों में ही रिफंड की कार्रवाई की जाएगी।
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ये है नियम लागू
बताया गया है कि वित्तीय रिफंड प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए धनराशि की सीमा और विधिक आवश्यकताओं को तीन श्रेणियों में स्पष्ट किया गया है। श्रेणी एक में एक ही बैंक खाते में 50 तक की होल्ड धनराशि से संबंधित है। यदि एनसीआरपी शिकायत के माध्यम से पीड़ित की किसी एक ही बैंक खाते में 50 हजार तक की धनराशि होल्ड हुई है, तो इसके लिए किसी भी एफआईआर न्यायालय के आदेश की आवश्यकता नहीं होगी। पुलिस आख्या- इंडेमनिटी बॉन्ड के आधार पर ही इस पोर्टल के माध्यम से पैसा सीधे पीड़ित के बैंक खाते में रिफंड कर दिया जाएगा। श्रेणी दो में कुल धनराशि 50 हजार से अधिक है और पृथक-पृथक बैंक खातों में 50 से कम है व किसी भी एकल बैंक खाते में होल्ड राशि 50 हजार से अधिक नहीं है, तो इस स्थिति में भी बिना किसी एफआईआर या न्यायालय के आदेश के, केवल पुलिस रिपोर्ट के आधार पर पोर्टल के माध्यम से रिफंड किया जाएगा। श्रेणी ती में बताया गया है कि एक ही बैंक खाते में 50 हजार से अधिक की होल्ड धनराशि है और यदि एनसीआरपी शिकायत के उपरांत पीड़ित की किसी एक ही बैंक खाते में 50 हजार से अधिक की धनराशि होल्ड हुई है, तो नियमानुसार विधिक कार्यवाही के लिए एफआईआर दर्ज होना अनिवार्य है।
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की गई विशेष अपील:
- यूजर मैनुअल गाइड की सुविधा: यदि पोर्टल पर रिफंड रिक्वेस्ट जनरेट करने में किसी भी प्रकार की परेशानी या तकनीकी असमंजस हो, तो एमआरएम के दिए गए आधिकारिक लिंक पर यूजर मैनुअल गाइड भी उपलब्ध है। इसे डाउनलोड कर आप स्टेप बाय स्टेप पूरी प्रक्रिया को आसानी से देख और समझ सकते हैं।
- बिचौलियों-दलालों से सावधान रहें: यह संपूर्ण प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क, सुरक्षित एवं पारदर्शी है। रिफंड के नाम पर किसी भी अज्ञात व्यक्ति को धनराशि न दें।
- केवल आधिकारिक लिंक का प्रयोग करें: आवेदन के लिए केवल अधिकृत सरकारी यूआरएल https://mrm-ncrp.mha.gov.in/ का ही उपयोग करें। किसी भी अन्य फर्जी लिंक या कॉल के झांसे में न आएं।
- तकनीकी सहायता: यदि ऑनलाइन फॉर्म भरने में इसके बाद भी कोई समस्या आती है, तो पीड़ित अपने नजदीकी थाने या जनपद के साइबर सेल में जाकर निःशुल्क सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
- केवल होल्ड धनराशि के लिए आवेदन: यह पोर्टल केवल उन्हीं आवेदनों को स्वीकार करेगा जिनकी धनराशि एनसीआरपी /1930 के माध्यम से समय रहते होल्ड करा दी गई है।


